ज्योतिष और स्वयं की की स्वयं की की बनाई हुई संपत्ति कुंडली का चतुर्थ भाव प्रॉपर्टी को देखा जाता है. चतुर्थ भाव से जातक की स्वयं के द्वारा बनाई हुई सम्पत्ति को देखा जाता है. कुंडली के चतुर्थ भाव पर शुभ ग्रह गुरु शुक्र बुध चंद्र का प्रभाव अधिक है तब व्यक्ति स्वयं की संपत्ति बनाता है. उदाहरण कुंडली में आप देख रहे हैं कि मेष लगना का जातक है इसके चौथे भाव में कर्क राशि में चंद्रमा बैठा है जो खुद की राशि है और उस शुभ ग्रह बुध और शुक्र सातवीं दृष्टि से उसे देख रहे हैं यह दर्शाता है कि जातक के पास अपने खुद की अर्जित संपत्ति है अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर देख सकते हैं कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर है आपकी अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर संपत्ति है आपकी अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर कर में यह सूत्रों को लगा कर कर अपनी कुंडली में यह सूत्रों को लगा कर देख सकते हैं । धन्यवाद।

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