ज्योतिष सूत्र :मंगल और शनि योग : मंगल शनि का योग, जिस भाव में बनता और उसभाव से उथल-पुथल कर देता है अगर यह मांगलिक दोष वाले भाव में बैठकर मंगल शनि की युति होती है तो शादी से परेशानियां उत्पन्न करता है ऐसे अगर एक कैरियर भावमें बन रहा होगा तो कैरियर में उथल-पुथल रहेगी जातक का तकनीकी क्षेत्र में अपना कार्यक्षेत्र रहेगा साथ साथ में यह हो सकता है कि मंगल अगर योगकारक है तो मंगल का प्रभाव होगा, कुंडली में शनि योगकारक है तो शनि का प्रभाव रहेगा तो आप भी अपनी कुंडली मैं देख सकते है वृश्चिक लग्न की कुंडली है और जातक की कुंडली में दशम भाव में शनि मंगल की युति
है तो यहां पर मंगल का प्रभाव है जातक इंजीनियरिंग में आया तथा कार्यक्षेत्र में उथल-पुथल रहती है । शनि ग्रह मंगल का योग करियर के लिए संघर्ष पूर्ण रहता है ।दे
करियर की स्थिरता आने में में बहुत समय लगता है और व्यक्ति को बहुत अधिक कार्य करना पड़ता है तब जाकर सफलता मिलती है। शनि मंगल का योग व्यक्ति को तकनीकी कार्यों जैसे इंजीनियरिंग आदि में प्रगति कराता है। यह योग कुंडली के शुभ भावों में होने पर व्यक्ति संघर्ष से अपनी तकनीकी प्रतिभाओं के द्वारा सफलता देर से प्राप्त करता है है । शनि मंगल का योग यदि कुंडली के छठे या आठवे भाव में हो तो पुष्पा से संबंधित स्वास्थ्य की परेशानियां होती है तथा कष्ट उत्पन्न करता है शनि मंगल का योग पाचनतंत्र और एक्सीडेंट की समस्याएं देता है। कुंडली में बलवान शनि सुखकारी तथा निर्बल या पीड़ित शनि कष्टकारक और दुखदायी होता है। विपरीत स्वभाव ग्रह है।
शनि मंगल यह योग लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में होने पर मंगल दोषबनाता को अधिक अमंगलकारी बनाता
जातक के जीवन में वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां आती हैं। रिश्ते टूटते हैं, विवाह देर से होता है और विवाह के बाद भी जीवन हो शांत रहता है रहता है। विवाह विच्छेद की संभावनाओं को बढ़ाता है को बढ़ाता है।contact 8319942286,9893234239.

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